Sher , Nazm aur Ghazal Thread, ख़ुदी को छोड़ कर .. in
Mulahiza Farmaiye ; जब हसीं आँख के पैमाने छलक जाते हैं ;
लोग मदहोश हो के राह भटक जाते हैं .
ये जानते ... -
ख़ुदी को छोड़ कर ..
जब हसीं आँख के पैमाने छलक जाते हैं ;
लोग मदहोश हो के राह भटक जाते हैं .
ये जानते हुए भी , जल्द ही मिट जाना है ;
रेत पे नाम सब लिखवाने चले जाते हैं .
पनाह हुस्न की , थोड़े दिनों तक पा के लोग ;
तमाम उम्र को बनवास चले जाते हैं .
जिंदगी जश्न के संग बीत रही हो , फिर भी ;
इश्क में खुद को सब तड़पाने चले आते हैं .
किसी के दर्द से , कोई उबर सके कैसे ;
पुराने ख़त मुए भरमाने चले आते हैं .
ख़ुदी को छोड़ कर , जिसको ख़ुदा बनाया था ;
गज़ब सितम है , वही नज़र अब चुराते हैं .
इश्क की राह भी कितनी अजीब होती है ;
सोच के निकलो कहाँ , कहाँ चले आते हैं .
तेरी चाहत में , जिस्म ओढ़ , जहाँ में आया ;
तुझे ही रास ना आया तो छोड़ जाते हैं .
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